किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंत्रिन्ह सहित इहाँ एक बारा। बैठ रहेउँ मैं करत बिचारा।।
मूल पाठ
मंत्रिन्ह सहित इहाँ एक बारा। बैठ रहेउँ मैं करत बिचारा।।
गगन पंथ देखी मैं जाता। परबस परी बहुत बिलपाता।।
स्रोत अभिलेख 4.5 · पुस्तक पृ. 685, 686
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं एक बार यहाँ मन्त्रियोंके साथ बैठा हुआ कुछ विचार कर रहा था। तब मैंने पराये (शत्रु) के वशमें पड़ी बहुत विलाप करती हुई सीताजीको आकाशमार्गसे जाते देखा था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 686 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंत्रिन्ह सहित इहाँ एक बारा। बैठ रहेउँ मैं करत बिचारा।।
English explanation
Once I was sitting here with my ministers, deliberating.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंत्रिन्ह | मंत्रियों के | ministers |
| सहित | साथ | with |
| इहाँ | यहाँ | here |
| एक | एक | one |
| बारा | बार | occasion |
| बैठ | बैठा | seated |
| रहेउँ | हुआ था | was |
| मैं | मैं | I |
| करत | करते हुए | doing; engaged in |
| बिचारा | विचार; मंत्रणा | reflection; deliberation |
2 गगन पंथ देखी मैं जाता। परबस परी बहुत बिलपाता।।
English explanation
I saw her passing through the sky, helpless in another’s power and lamenting greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गगन | आकाश | sky |
| पंथ | मार्ग से | along the path |
| देखी | देखा | saw |
| मैं | मैंने | I |
| जाता | जाते हुए | passing; going |
| परबस | दूसरे के वश में; असहाय | in another’s power; helpless |
| परी | पड़ी हुई | placed; fallen into that state |
| बहुत | बहुत | greatly |
| बिलपाता | विलाप करती हुई | lamenting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 686
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 686
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