किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनोंने [हृदयसे] प्रीति की, कुछ भी अन्तर नहीं रखा। तब लक्ष्मणजीने श्रीरामचन्द्रजीका सारा इतिहास कहा। सुग्रीवने नेत्रोंमें जल भरकर कहा—हे नाथ! मिथिलेशकुमारी जानकीजी मिल जायँगी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 685 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
कह सुग्रीव नयन भरि बारी। मिलिहि नाथ मिथिलेसकुमारी।।
स्रोत अभिलेख 4.5 · पुस्तक पृ. 685, 686
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
English explanation
They formed a bond of friendship, keeping no reserve between them. Lakshmana recounted all of Rama’s story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ही | की | formed |
| प्रीति | मैत्री; स्नेह | friendship; affection |
| कछु | कुछ भी | anything |
| बीच | आपस के बीच | between them |
| न | नहीं | not |
| राखा | रखा | kept |
| लछमिन | लक्ष्मण ने, राम के छोटे भाई ने | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| राम | राम का | Rama’s |
| चरित | वृत्तांत | story; account |
| सब | सारा | all |
| भाषा | कहा; सुनाया | recounted |
2 कह सुग्रीव नयन भरि बारी। मिलिहि नाथ मिथिलेसकुमारी।।
English explanation
With tears filling his eyes, Sugriva said, ‘Lord, Sita, the daughter of Mithila’s king, will be found.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| सुग्रीव | सुग्रीव ने, राम के वानर मित्र ने | Sugriva, Rama’s monkey ally |
| नयन | आँखों में | in his eyes |
| भरि | भरकर | filling |
| बारी | जल; आँसू | water; tears |
| मिलिहि | मिल जाएँगी | will be found |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| मिथिलेसकुमारी | मिथिला के राजा जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka, king of Mithila |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 685
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 686
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।