किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा।।
मूल पाठ
कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा।।
सब प्रकार करिहउँ सेवकाई। जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई।।
स्रोत अभिलेख 4.5 · पुस्तक पृ. 685, 686
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुग्रीवने कहा—हे रघुवीर! सुनिये, सोच छोड़ दीजिये और मनमें धीरज लाइये। मैं सब प्रकारसे आपकी सेवा करूँगा, जिस उपायसे जानकीजी आकर आपको मिलें॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 686 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा।।
English explanation
Sugriva said, ‘Listen, O hero of Raghu’s lineage. Give up grief and bring steadiness to your mind.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| सुग्रीव | सुग्रीव ने | Sugriva |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| रघुबीरा | हे रघुकुल के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s lineage |
| तजहु | छोड़िए | give up |
| सोच | शोक; चिंता | grief; distress |
| मन | मन में | into your mind |
| आनहु | लाइए | bring |
| धीरा | धैर्य; स्थिरता | patience; steadiness |
2 सब प्रकार करिहउँ सेवकाई। जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई।।
English explanation
I will serve you in every way so that Janaki may return and be reunited with you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब; हर | every |
| प्रकार | प्रकार से | way; manner |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I will do |
| सेवकाई | सेवा | service |
| जेहि | जिस | by which |
| बिधि | विधि से; उपाय से | means; method |
| मिलिहि | मिलेंगी | will be reunited |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, Janaka’s daughter |
| आई | आकर | having come; returning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 686
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 686
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।