किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रस रस सूख सरित सर पानी। ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी।।
मूल पाठ
रस रस सूख सरित सर पानी। ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी।।
जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 4.16 · पुस्तक पृ. 697, 698
भावार्थ
मूल पाठ के बादनदी और तालाबोंका जल धीरे-धीरे सूख रहा है। जैसे ज्ञानी (विवेकी) पुरुष ममताका त्याग करते हैं। शरद्-ऋतु जानकर खंजन पक्षी आ गये। जैसे समय पाकर सुन्दर सुकृत आ जाते हैं (पुण्य प्रकट हो जाते हैं)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 698 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रस रस सूख सरित सर पानी। ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी।।
English explanation
The water in rivers and lakes gradually dries up, just as the wise relinquish possessive attachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रस | धीरे | little |
| रस | धीरे | by little |
| सूख | सूख रहा है | is drying up |
| सरित | नदियों का | of rivers |
| सर | सरोवरों का | of lakes |
| पानी | पानी | water |
| ममता | मेरा-पन और आसक्ति | possessive attachment |
| त्याग | त्याग | relinquishment |
| करहिं | करते हैं | carry out |
| जिमि | जैसे | just as |
| ग्यानी | ज्ञानी लोग | the wise |
2 जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।
English explanation
Recognizing autumn, wagtails have arrived, just as fine meritorious deeds appear at the proper time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | recognizing |
| सरद | शरद | autumn |
| रितु | ऋतु | season |
| खंजन | खंजन पक्षी | wagtails |
| आए | आ गए | have arrived |
| पाइ | पाकर | having found |
| समय | उचित समय | the proper time |
| जिमि | जैसे | just as |
| सुकृत | पुण्यकर्म | meritorious deeds |
| सुहाए | शोभित हुए | appear beautifully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 698
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 697, 698
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।