किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उदित अगस्ति पंथ जल सोषा। जिमि लोभहि सोषइ संतोषा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअगस्त्यके तारेने उदय होकर मार्गके जलको सोख लिया, जैसे सन्तोष लोभको सोख लेता है। नदियों और तालाबोंका निर्मल जल ऐसी शोभा पा रहा है जैसे मद और मोहसे रहित संतोंका हृदय!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 697 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उदित अगस्ति पंथ जल सोषा। जिमि लोभहि सोषइ संतोषा।।
सरिता सर निर्मल जल सोहा। संत हृदय जस गत मद मोहा।।
स्रोत अभिलेख 4.16 · पुस्तक पृ. 697, 698
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उदित अगस्ति पंथ जल सोषा। जिमि लोभहि सोषइ संतोषा।।
English explanation
With the rising of the star Agastya, water on the paths dried up, just as contentment dries up greed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदित | उदय होने पर | upon rising |
| अगस्ति | अगस्त्य तारा | the star Agastya (Canopus) |
| पंथ | रास्तों का | on the paths |
| जल | पानी | water |
| सोषा | सूख गया | dried up |
| जिमि | जैसे | just as |
| लोभहि | लोभ को | greed |
| सोषइ | सुखा देता है | dries up |
| संतोषा | संतोष | contentment |
2 सरिता सर निर्मल जल सोहा। संत हृदय जस गत मद मोहा।।
English explanation
The clear waters of rivers and lakes shine beautifully, like the hearts of saints freed from pride and delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरिता | नदियों में | in rivers |
| सर | सरोवरों में | in lakes |
| निर्मल | स्वच्छ | clear |
| जल | पानी | water |
| सोहा | शोभित हुआ | shines beautifully |
| संत | संतों का | of saints |
| हृदय | हृदय | heart |
| जस | जैसे | like |
| गत | दूर हुए | departed; absent |
| मद | अहंकार | pride |
| मोहा | मोह | delusion and attachment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 697
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 697, 698
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।