किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई।।
मूल पाठ
बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई।।
फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 4.16 · पुस्तक पृ. 697, 698
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे लक्ष्मण! देखो, वर्षा बीत गयी और परम सुन्दर शरद्-ऋतु आ गयी। फूले हुए काससे सारी पृथ्वी छा गयी। मानो वर्षा-ऋतुने [कासरूपी सफेद बालोंके रूपमें] अपना बुढ़ापा प्रकट किया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 697 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई।।
English explanation
AI draft: The rainy season has passed and autumn has arrived. Look, Lakshmana, how lovely it is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषा | वर्षा ऋतु | the rainy season |
| बिगत | बीत गई | has passed |
| सरद | शरद | autumn |
| रितु | ऋतु | season |
| आई | आ गई | has arrived |
| लछिमन | हे लक्ष्मण, राम के अनुज | O Lakshmana, Rama’s younger brother |
| देखहु | देखो | look |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुहाई | सुंदर और मनोहर | lovely and pleasing |
2 फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई।।
English explanation
Blooming kans grass covers the whole earth, as though the rainy season has revealed its old age.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलें | फूले हुए | in bloom |
| कास | कास घास | kans grass |
| सकल | सारी | the whole |
| महि | धरती | earth |
| छाई | ढक गई | is covered |
| जनु | मानो | as though |
| बरषाँ | वर्षा ऋतु ने | the rainy season |
| कृत | कर दिया | has made |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| बुढ़ाई | बुढ़ापा | old age |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 697
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 697, 698
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।