किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मेली कंठ सुमन कै माला। पठवा पुनि बल देइ बिसाला।।
मूल पाठ
मेली कंठ सुमन कै माला। पठवा पुनि बल देइ बिसाला।।
पुनि नाना बिधि भई लराई। बिटप ओट देखहिं रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 4.8 · पुस्तक पृ. 690, 691
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब श्रीरामजीने सुग्रीवके गलेमें फूलोंकी माला डाल दी और फिर उसे बड़ा भारी बल देकर भेजा। दोनोंमें पुन: अनेक प्रकारसे युद्ध हुआ। श्रीरघुनाथजी वृक्षकी आड़से देख रहे थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 690 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मेली कंठ सुमन कै माला। पठवा पुनि बल देइ बिसाला।।
English explanation
Rama placed a flower garland around Sugriva’s neck and sent him out again after giving him great strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेली | डाली | placed |
| कंठ | गले में | around his neck |
| सुमन | फूलों | flowers |
| कै | की | of |
| माला | माला | garland |
| पठवा | भेजा | sent him out |
| पुनि | फिर | again |
| बल | शक्ति | strength |
| देइ | देकर | having given |
| बिसाला | बहुत अधिक | great |
2 पुनि नाना बिधि भई लराई। बिटप ओट देखहिं रघुराई।।
English explanation
Again they fought in various ways, while Rama watched from behind a tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| नाना | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| भई | हुई | took place |
| लराई | लड़ाई | fighting |
| बिटप | पेड़ की | of a tree |
| ओट | ओट से | from behind |
| देखहिं | देखते हैं | watches |
| रघुराई | रघुवंश के राजा राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 690
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 690, 691
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।