किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मम लोचन गोचर सोइ आवा। बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा।।
मूल पाठ
मम लोचन गोचर सोइ आवा। बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 692, 692
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह श्रीरामजी स्वयं मेरे नेत्रोंके सामने आ गये हैं। हे प्रभो! ऐसा संयोग क्या फिर कभी बन पड़ेगा?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 692 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मम लोचन गोचर सोइ आवा। बहुरि कि प्रभु अस बनिहि बनावा।।
English explanation
That very Lord has come before my eyes. O Lord, will such an opportunity ever arise again?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| लोचन | नेत्रों के | eyes’ |
| गोचर | दृष्टि के सामने | within sight |
| सोइ | वही | that very one |
| आवा | आ गए | has come |
| बहुरि | फिर | again |
| कि | क्या | will; whether |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| अस | ऐसा | such |
| बनिहि | बनेगा, घटित होगा | will arise |
| बनावा | अवसर, संयोग | opportunity, occasion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 692
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 692, 692
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।