किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं। अंत राम कहि आवत नाहीं।।
मूल पाठ
जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं। अंत राम कहि आवत नाहीं।।
जासु नाम बल संकर कासी। देत सबहि सम गति अविनासी।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 692, 692
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिगण जन्म-जन्ममें (प्रत्येक जन्ममें)[अनेकों प्रकारका] साधन करते रहते हैं। फिर भी अन्तकालमें उन्हें 'राम नहीं कह आता (उनके मुखसे रामनाम नहीं निकलता)। जिनके नामके बलसे शङ्करजी काशीमें सबको समानरूपसे अविनाशिनी गति (मुक्ति) देते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 692 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं। अंत राम कहि आवत नाहीं।।
English explanation
Sages strive birth after birth, yet at life’s end they cannot manage to utter ‘Rama.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन्म | जन्म | birth |
| जन्म | जन्म; हर जन्म में | after birth; in every lifetime |
| मुनि | मुनि, साधक ऋषि | sages |
| जतनु | प्रयत्न | effort |
| कराहीं | करते हैं | make |
| अंत | अंत समय में | at life’s end |
| राम | राम का नाम | the name Rama |
| कहि | कहना, उच्चारण करना | to say, to utter |
| आवत | हो पाता | is possible |
| नाहीं | नहीं | not |
2 जासु नाम बल संकर कासी। देत सबहि सम गति अविनासी।।
English explanation
By the power of whose name Shiva grants everyone equally the imperishable state of liberation in Kashi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके | whose |
| नाम | नाम के | name’s |
| बल | बल से | by the power |
| संकर | शंकर, शिव | Shiva |
| कासी | काशी में | in Kashi |
| देत | देते हैं | grants |
| सबहि | सभी को | to everyone |
| सम | समान रूप से | equally |
| गति | परम गति, मुक्ति | final liberation |
| अविनासी | अविनाशी | imperishable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 692
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 692, 692
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।