किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भय अरु प्रीति नीति देखाई। चले सकल चरनन्हि सिर नाई।।
मूल पाठ
भय अरु प्रीति नीति देखाई। चले सकल चरनन्हि सिर नाई।।
एहि अवसर लछिमन पुर आए। क्रोध देखि जहँ तहँ कपि धाए।।
स्रोत अभिलेख 4.19 · पुस्तक पृ. 700, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादसबको भय, प्रीति और नीति दिखलायी। सब बंदर चरणोंमें सिर नवाकर चले। इसी समय लक्ष्मणजी नगरमें आये। उनका क्रोध देखकर बंदर जहाँ-तहाँ भागे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 700 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भय अरु प्रीति नीति देखाई। चले सकल चरनन्हि सिर नाई।।
English explanation
Hanuman explained the policy of fear and affection to them; all bowed their heads at his feet and departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भय | भय की | fear |
| अरु | और | and |
| प्रीति | प्रेम की | affection |
| नीति | नीति | policy |
| देखाई | समझाई | explained |
| चले | चल पड़े | departed |
| सकल | सभी | all |
| चरनन्हि | चरणों में | at his feet |
| सिर | सिर | their heads |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
2 एहि अवसर लछिमन पुर आए। क्रोध देखि जहँ तहँ कपि धाए।।
English explanation
At this moment Lakshmana entered the city. Seeing his anger, the monkeys ran in all directions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| अवसर | समय | moment |
| लछिमन | राम के भाई लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| पुर | नगर में | into the city |
| आए | आए | came |
| क्रोध | उनका क्रोध | his anger |
| देखि | देखकर | seeing |
| जहँ | इधर | here |
| तहँ | उधर | there |
| कपि | वानर | monkeys |
| धाए | भागे | ran |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 700
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 700, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।