किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु पाख महुँ आव न जोई। मोरें कर ता कर बध होई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर कहला दो कि एक पखवाड़ेमें (पंद्रह दिनोंमें) जो न आ जायगा, उसका मेरे हाथों वध होगा। तब हनुमान्जीने दूतोंको बुलाया और सबका बहुत सम्मान करके—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 700 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहु पाख महुँ आव न जोई। मोरें कर ता कर बध होई।।
तब हनुमंत बोलाए दूता। सब कर करि सनमान बहूता।।
स्रोत अभिलेख 4.19 · पुस्तक पृ. 700, 700
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहु पाख महुँ आव न जोई। मोरें कर ता कर बध होई।।
English explanation
‘Tell them that whoever does not come within a fortnight will be killed by my own hand.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | कह दो | tell them |
| पाख | पखवाड़े | a fortnight |
| महुँ | के भीतर | within |
| आव | आए | comes |
| न | नहीं | not |
| जोई | जो कोई | whoever |
| मोरें | मेरे | my |
| कर | हाथ से | by the hand |
| ता | उसका | that person |
| कर | का | possessive marker |
| बध | वध | slaying |
| होई | होगा | will occur |
2 तब हनुमंत बोलाए दूता। सब कर करि सनमान बहूता।।
English explanation
Then Hanuman summoned the messengers and showed them all great respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान ने | Hanuman |
| बोलाए | बुलाए | summoned |
| दूता | दूतों को | the messengers |
| सब | सबका | all of them |
| कर | का | possessive marker |
| करि | करके | having given |
| सनमान | सम्मान | respect |
| बहूता | बहुत | abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 700
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 700, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।