किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बालि त्रास ब्याकुल दिन राती। तन बहु ब्रन चिंताँ जर छाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो सुग्रीव दिन-रात बालिके भयसे व्याकुल रहता था, जिसके शरीरमें बहुत-से घाव हो गये थे और जिसकी छाती चिन्ताके मारे जला करती थी, उसी सुग्रीवको उन्होंने वानरोंका राजा बना दिया। श्रीरामचन्द्रजीका स्वभाव अत्यन्त ही कृपालु है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 694 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बालि त्रास ब्याकुल दिन राती। तन बहु ब्रन चिंताँ जर छाती।।
सोइ सुग्रीव कीन्ह कपिराऊ। अति कृपाल रघुबीर सुभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 4.12 · पुस्तक पृ. 694, 694
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बालि त्रास ब्याकुल दिन राती। तन बहु ब्रन चिंताँ जर छाती।।
English explanation
Sugriva was distressed day and night by fear of Bali; his body bore many wounds, and his heart burned with anxiety.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालि | सुग्रीव के बड़े भाई बालि का | of Bali, Sugriva’s elder brother |
| त्रास | भय | fear |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| दिन | दिन | day |
| राती | रात | night |
| तन | शरीर पर | on the body |
| बहु | बहुत-से | many |
| ब्रन | घाव | wounds |
| चिंताँ | चिंता से | with anxiety |
| जर | जलती थी | burned |
| छाती | छाती | chest; heart |
2 सोइ सुग्रीव कीन्ह कपिराऊ। अति कृपाल रघुबीर सुभाऊ।।
English explanation
Rama made that very Sugriva king of the monkeys; Rama’s nature is exceedingly compassionate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | उसी को | that very one |
| सुग्रीव | सुग्रीव को | Sugriva |
| कीन्ह | बना दिया | made |
| कपिराऊ | वानरों का राजा | king of the monkeys |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 694
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 694, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।