किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानतहुँ अस प्रभु परिहरहीं। काहे न बिपति जाल नर परहीं।।
मूल पाठ
जानतहुँ अस प्रभु परिहरहीं। काहे न बिपति जाल नर परहीं।।
पुनि सुग्रीवहि लीन्ह बोलाई। बहु प्रकार नृपनीति सिखाई।।
स्रोत अभिलेख 4.12 · पुस्तक पृ. 694, 694
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो लोग जानते हुए भी ऐसे प्रभुको त्याग देते हैं, वे क्यों न विपत्तिके जालमें फँसें? फिर श्रीरामजीने सुग्रीवको बुला लिया और बहुत प्रकारसे उन्हें राजनीतिकी शिक्षा दी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 694 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानतहुँ अस प्रभु परिहरहीं। काहे न बिपति जाल नर परहीं।।
English explanation
Even knowing this, people abandon such a Lord; why, then, would they not fall into a net of troubles?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानतहुँ | जानते हुए भी | even while knowing |
| अस | ऐसे | such a |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| परिहरहीं | त्याग देते हैं | abandon |
| काहे | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| बिपति | विपत्तियों के | of troubles |
| जाल | जाल में | into a net |
| नर | मनुष्य | people |
| परहीं | पड़ें | fall |
2 पुनि सुग्रीवहि लीन्ह बोलाई। बहु प्रकार नृपनीति सिखाई।।
English explanation
Then Rama called Sugriva to him and taught him royal duties and statecraft in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| सुग्रीवहि | सुग्रीव को | Sugriva |
| लीन्ह | ले लिया | had him brought |
| बोलाई | बुलाकर | by calling |
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| नृपनीति | राजधर्म और शासन-नीति | royal duties and statecraft |
| सिखाई | सिखाई | taught |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 694
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 694, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।