किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा। पुर न जाउँ दस चारि बरीसा।।
मूल पाठ
कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा। पुर न जाउँ दस चारि बरीसा।।
गत ग्रीषम बरषा रितु आई। रहिहउँ निकट सैल पर छाई।।
स्रोत अभिलेख 4.12 · पुस्तक पृ. 694, 694
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर प्रभुने कहा—हे वानरपति सुग्रीव! सुनो, मैं चौदह वर्षतक गाँव (बस्ती) में नहीं जाऊँगा। ग्रीष्म-ऋतु बीतकर वर्षा-ऋतु आ गयी। अत: मैं यहाँ पास ही पर्वतपर टिक रहूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 694 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा। पुर न जाउँ दस चारि बरीसा।।
English explanation
The Lord said, ‘Listen, Sugriva, king of the monkeys: I will not enter a city for fourteen years.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| सुनु | सुनो | listen |
| सुग्रीव | हे सुग्रीव | O Sugriva |
| हरीसा | हे वानरों के राजा | O king of the monkeys |
| पुर | नगर में | into a city |
| न | नहीं | not |
| जाउँ | मैं जाऊँगा | I will go |
| दस | दस | ten |
| चारि | चार | four |
| बरीसा | वर्ष | years |
2 गत ग्रीषम बरषा रितु आई। रहिहउँ निकट सैल पर छाई।।
English explanation
‘Summer has passed and the rainy season has arrived; I will stay on the nearby mountain.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गत | बीत गया | has passed |
| ग्रीषम | ग्रीष्म | summer |
| बरषा | वर्षा | rainy |
| रितु | ऋतु | season |
| आई | आ गई | has arrived |
| रहिहउँ | मैं रहूँगा | I will stay |
| निकट | पास के | nearby |
| सैल | पर्वत | mountain |
| पर | पर | on |
| छाई | ठहरकर | taking up residence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 694
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 694, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।