किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। सो सुख उमा नहिं बरना।।
मूल पाठ
प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। सो सुख उमा नहिं बरना।।
पुलकित तन मुख आव न बचना। देखत रुचिर बेष कै रचना।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 683, 684
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुको पहचानकर हनुमान्जी उनके चरण पकड़कर पृथ्वीपर गिर पड़े (उन्होंने साष्टाङ्ग दण्डवत्-प्रणाम किया)। [शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! वह सुख वर्णन नहीं किया जा सकता। शरीर पुलकित है, मुखसे वचन नहीं निकलता। वे प्रभुके सुन्दर वेषकी रचना देख रहे हैं!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 683 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना। सो सुख उमा नहिं बरना।।
English explanation
Recognizing his Lord, Hanuman fell down clasping his feet. O Uma, that joy cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| पहिचानि | पहचानकर | having recognized |
| परेउ | गिर पड़े | fell down |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| चरना | चरणों को | his feet |
| सो | वह | that |
| सुख | आनंद | joy |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| नहिं | नहीं | cannot |
| बरना | वर्णित किया जा सकता | be described |
2 पुलकित तन मुख आव न बचना। देखत रुचिर बेष कै रचना।।
English explanation
As Hanuman gazed at the beauty of their lovely attire, his body thrilled and no words came from his mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| तन | शरीर | body |
| मुख | मुख से | from the mouth |
| आव | आते हैं | come |
| न | नहीं | not |
| बचना | वचन | words |
| देखत | देखते हुए | gazing at |
| रुचिर | सुंदर | lovely |
| बेष | वेश | attire |
| कै | की | of |
| रचना | सज्जा और छटा | arrangement and beauty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 683
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 683, 684
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।