किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ हरि निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही।।
मूल पाठ
इहाँ हरि निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही।।
आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 683, 684
भावार्थ
मूल पाठ के बादयहाँ (वनमें) राक्षसने [मेरी पत्नी] जानकीको हर लिया। हे ब्राह्मण! हम उसे ही खोजते फिरते हैं। हमने तो अपना चरित्र कह सुनाया। अब हे ब्राह्मण! अपनी कथा समझाकर कहिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 683 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 इहाँ हरि निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही।।
English explanation
Here a demon abducted Sita. O Brahmin, we are wandering in search of her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ | here |
| हरि | हरण कर लिया | abducted |
| निसिचर | राक्षस ने | a demon |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता को | Sita, daughter of Videha's king |
| बिप्र | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| फिरहिं | फिर रहे हैं | are wandering |
| हम | हम | we |
| खोजत | खोजते हुए | searching for |
| तेही | उन्हीं सीता को | that very woman, Sita |
2 आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई।।
English explanation
We have recounted our story. O Brahmin, now explain and tell us your own story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आपन | अपना | our own |
| चरित | जीवन-वृत्त | story |
| कहा | कहा | told |
| हम | हमने | we |
| गाई | वर्णन करके | by recounting |
| कहहु | कहिए | please tell |
| बिप्र | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| निज | अपनी | your own |
| कथा | कथा | story |
| बुझाई | समझाकर | explaining clearly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 683
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 683, 684
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।