किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा। जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा।।
मूल पाठ
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा। जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा।।
उपजा ग्यान चरन तब लागी। लीन्हेसि परम भगति बर मागी।।
स्रोत अभिलेख 4.11 · पुस्तक पृ. 693, 694
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह शरीर तो प्रत्यक्ष तुम्हारे सामने सोया हुआ है, और जीव नित्य है। फिर तुम किसके लिये रो रही हो? जब ज्ञान उत्पन्न हो गया, तब वह भगवान्के चरणों लगी और उसने परम भक्तिका वर माँग लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 693 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रगट सो तनु तव आगें सोवा। जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा।।
English explanation
That body lies plainly before you; the soul is eternal. For whom are you weeping?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रगट | प्रत्यक्ष | plainly visible |
| सो | वह | that |
| तनु | शरीर | body |
| तव | तुम्हारे | your |
| आगें | सामने | before |
| सोवा | पड़ा है | lies |
| जीव | जीवात्मा | the soul |
| नित्य | नित्य है | is eternal |
| केहि | किसके | whom |
| लगि | लिए | for |
| तुम्ह | तुम | you |
| रोवा | रो रही हो | are weeping |
2 उपजा ग्यान चरन तब लागी। लीन्हेसि परम भगति बर मागी।।
English explanation
Understanding arose, and Tara then bowed at Rama’s feet. She asked for and received the boon of supreme devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| ग्यान | ज्ञान | understanding |
| चरन | राम के चरणों में | at Rama’s feet |
| तब | तब | then |
| लागी | लगी; प्रणाम किया | bowed |
| लीन्हेसि | उसने प्राप्त किया | she received |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| भगति | भक्ति का | of devotion |
| बर | वरदान | boon |
| मागी | माँगकर | having asked for |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 693
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 693, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।