किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तारा बिकल देखि रघुराया । दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दताराको व्याकुल देखकर श्रीरघुनाथजीने उसे ज्ञान दिया और उसकी माया (अज्ञान) हर ली। [उन्होंने कहा—] पृथ्वी, जल, अग्रि, आकाश और वायु—इन पाँच तत्त्वोंसे यह अत्यन्त अधम शरीर रचा गया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 693 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तारा बिकल देखि रघुराया । दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया।।
छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।
स्रोत अभिलेख 4.11 · पुस्तक पृ. 693, 694
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तारा बिकल देखि रघुराया । दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया।।
English explanation
Seeing Tara distraught, Rama, king of the Raghu lineage, gave her knowledge and removed her delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तारा | तारा को | Tara |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| देखि | देखकर | seeing |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम ने | Rama, king of the Raghu lineage |
| दीन्ह | दिया | gave |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| हरि | हर | removed |
| लीन्ही | लिया | completed the removal |
| माया | माया-मोह | delusion |
2 छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।
English explanation
This very lowly body is formed from five elements: earth, water, fire, space, and air.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छिति | पृथ्वी | earth |
| जल | जल | water |
| पावक | अग्नि | fire |
| गगन | आकाश | space |
| समीरा | वायु | air |
| पंच | इन पाँच तत्वों से | from these five elements |
| रचित | बना हुआ | formed |
| अति | अत्यंत | very |
| अधम | अधम | lowly |
| सरीरा | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 693
- सहायक विषय
- ताराका विलाप, ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
- मुद्रित पृष्ठ
- 693, 694
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।