किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि पुनि चितइ चरन चित दीन्हा। सुफल जन्म माना प्रभु चीन्हा।।
मूल पाठ
पुनि पुनि चितइ चरन चित दीन्हा। सुफल जन्म माना प्रभु चीन्हा।।
हृदयँ प्रीति मुख बचन कठोरा। बोला चितइ राम की ओरा।।
स्रोत अभिलेख 4.9 · पुस्तक पृ. 691, 691
भावार्थ
मूल पाठ के बादबालिने बार-बार भगवान्की ओर देखकर चित्तको उनके चरणोंमें लगा दिया। प्रभुको पहचानकर उसने अपना जन्म सफल माना। उसके हृदयमें प्रीति थी, पर मुखमें कठोर वचन थे। वह श्रीरामजीकी ओर देखकर बोला—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 691 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि पुनि चितइ चरन चित दीन्हा। सुफल जन्म माना प्रभु चीन्हा।।
English explanation
Looking again and again, Bali fixed his mind on the Lord’s feet. Recognizing the Lord, he considered his birth fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| चितइ | देखकर | looking |
| चरन | चरणों में | on the feet |
| चित | चित्त | mind |
| दीन्हा | लगाया | fixed |
| सुफल | सफल | fulfilled |
| जन्म | जन्म | birth |
| माना | माना | considered |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| चीन्हा | पहचाना | recognized |
2 हृदयँ प्रीति मुख बचन कठोरा। बोला चितइ राम की ओरा।।
English explanation
There was love in his heart, but harsh words on his lips. Looking toward Rama, Bali spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| प्रीति | प्रेम | love |
| मुख | मुख से | from the mouth |
| बचन | वचन | words |
| कठोरा | कठोर | harsh |
| बोला | बोला | spoke |
| चितइ | देखकर | looking |
| राम | राम | Rama, the Lord |
| की | की | of |
| ओरा | ओर | direction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 691
- सहायक विषय
- बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 691, 691
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।