किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पिता बधे पर मारत मोही। राखा राम निहोर न ओही।।
मूल पाठ
पिता बधे पर मारत मोही। राखा राम निहोर न ओही।।
पुनि पुनि अंगद कह सब पाहीं। मरन भयउ कछु संसय नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 4.26 · पुस्तक पृ. 706, 707
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे तो पिताके वध होनेपर ही मुझे मार डालते। श्रीरामजीने ही मेरी रक्षा की, इसमें सुग्रीवका कोई एहसान नहीं है। अंगद बार-बार सबसे कह रहे हैं कि अब मरण हुआ, इसमें कुछ भी सन्देह नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 706 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पिता बधे पर मारत मोही। राखा राम निहोर न ओही।।
English explanation
After my father was killed, he would have killed me too; Rama protected me—it was no favor from him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिता | मेरे पिता बालि | my father Bali |
| बधे | मारे जाने | being killed |
| पर | पर; उसके बाद | upon; after |
| मारत | मार डालते | would have killed |
| मोही | मुझे | me |
| राखा | बचाया | protected |
| राम | राम ने | Rama |
| निहोर | उपकार; एहसान | favor; kindness |
| न | नहीं | not |
| ओही | उनका, सुग्रीव का | his, Sugriva’s |
2 पुनि पुनि अंगद कह सब पाहीं। मरन भयउ कछु संसय नाहीं।।
English explanation
Angada repeatedly tells everyone: Our death is certain; there is no doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| कह | कहते हैं | says |
| सब | सबके | everyone |
| पाहीं | पास; से | to |
| मरन | मरना | death |
| भयउ | निश्चित हो गया | has become certain |
| कछु | कोई भी | any |
| संसय | संदेह | doubt |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 706
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 706, 707
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।