किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंगद बचन सुनत कपि बीरा। बोलि न सकहिं नयन बह नीरा।।
मूल पाठ
अंगद बचन सुनत कपि बीरा। बोलि न सकहिं नयन बह नीरा।।
छन एक सोच मगन होइ रहे। पुनि अस वचन कहत सब भए।।
स्रोत अभिलेख 4.26 · पुस्तक पृ. 706, 707
भावार्थ
मूल पाठ के बादवानर वीर अंगदके वचन सुनते हैं; किन्तु कुछ बोल नहीं सकते। उनके नेत्रोंसे जल बह रहा है। एक क्षणके लिये सब सोचमें मग्र हो रहे। फिर सब ऐसा वचन कहने लगे—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 706 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अंगद बचन सुनत कपि बीरा। बोलि न सकहिं नयन बह नीरा।।
English explanation
Hearing Angada’s words, the valiant monkeys cannot speak; tears flow from their eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | अंगद के | Angada’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| कपि | वानर | monkeys |
| बीरा | वीर | valiant |
| बोलि | बोल | speak |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| नयन | आँखों से | from their eyes |
| बह | बहता है | flows |
| नीरा | जल; आँसू | water; tears |
2 छन एक सोच मगन होइ रहे। पुनि अस वचन कहत सब भए।।
English explanation
For a moment they remained absorbed in distress; then they all began to speak thus.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छन | क्षण | moment |
| एक | एक | one |
| सोच | चिंता में | in distress |
| मगन | डूबे हुए | absorbed |
| होइ | होकर | having become |
| रहे | रहे | remained |
| पुनि | फिर | then |
| अस | ऐसे | such |
| वचन | वचन | words |
| कहत | कहने | speaking |
| सब | सब | all |
| भए | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 706
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 706, 707
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।