किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पापिउ जा कर नाम सुमिरहीं। अति अपार भवसागर तरहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपापी भी जिनका नाम स्मरण करके अत्यन्त अपार भवसागरसे तर जाते हैं, तुम उनके दूत हो, अत: कायरता छोड़कर श्रीरामजीको हृदयमें धारण करके उपाय करो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 709 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पापिउ जा कर नाम सुमिरहीं। अति अपार भवसागर तरहीं।।
तासु दूत तुम्ह तजि कदराई। राम हृदयँ धरि करहु उपाई।।
स्रोत अभिलेख 4.29 · पुस्तक पृ. 709, 710
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पापिउ जा कर नाम सुमिरहीं। अति अपार भवसागर तरहीं।।
English explanation
Even sinners cross the immensely boundless ocean of worldly existence by remembering his name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पापिउ | पापी भी | even sinners |
| जा | जिनका | whose |
| कर | का; संबंधसूचक | possessive marker |
| नाम | नाम | name |
| सुमिरहीं | स्मरण करते हैं | remember |
| अति | अत्यंत | immensely |
| अपार | जिसका पार नहीं दिखता | boundless |
| भवसागर | संसाररूपी सागर | the ocean of worldly existence |
| तरहीं | पार कर जाते हैं | cross over |
2 तासु दूत तुम्ह तजि कदराई। राम हृदयँ धरि करहु उपाई।।
English explanation
You are his messengers; abandon timidity, hold Rama in your hearts, and devise a means.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उन्हीं राम के | of that same Rama |
| दूत | दूत | messengers |
| तुम्ह | तुम | you |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| कदराई | कायरता; डर | timidity; fear |
| राम | राम को | Rama |
| हृदयँ | हृदय में | in your hearts |
| धरि | धारण करके | holding |
| करहु | करो | make; undertake |
| उपाई | उपाय | a means; a plan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 709
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 709, 710
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।