किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो नाघइ सत जोजन सागर । करइ सो राम काज मति आगर ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो सौ योजन (चार सौ कोस) समुद्र लाँघ सकेगा और बुद्धिनिधान होगा वही श्रीरामजीका कार्य कर सकेगा। [निराश होकर घबराओ मत] मुझे देखकर मनमें धीरज धरो। देखो, श्रीरामजीकी कृपासे [देखते- ही-देखते] मेरा शरीर कैसा हो गया (बिना पाँखका बेहाल था, पाँख उगनेसे सुन्दर हो गया)!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 709 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो नाघइ सत जोजन सागर । करइ सो राम काज मति आगर ।।
मोहि बिलोकि धरहु मन धीरा । राम कृपाँ कस भयउ सरीरा।।
स्रोत अभिलेख 4.29 · पुस्तक पृ. 709, 710
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जो नाघइ सत जोजन सागर । करइ सो राम काज मति आगर ।।
English explanation
AI draft: Whoever can leap across the hundred-yojana sea should accomplish Rama’s task, being a storehouse of wisdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| नाघइ | लाँघ सके | can leap across |
| सत | सौ | one hundred |
| जोजन | योजन, दूरी की प्राचीन इकाई | yojanas, an ancient distance unit |
| सागर | समुद्र | the sea |
| करइ | करे | should perform |
| सो | वही | that very person |
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| काज | कार्य | task |
| मति | बुद्धि का | of wisdom |
| आगर | भंडार | a storehouse |
2 मोहि बिलोकि धरहु मन धीरा । राम कृपाँ कस भयउ सरीरा।।
English explanation
Look at me and take courage; see what my body has become through Rama’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोहि | मुझे, संपाति को | me, Sampati |
| बिलोकि | देखकर | having looked at |
| धरहु | रखो | hold; maintain |
| मन | मन में | in your minds |
| धीरा | धैर्य | courage; composure |
| राम | राम की | Rama’s |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| कस | कैसा | what a change; how |
| भयउ | हो गया | has become |
| सरीरा | मेरा शरीर | my body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 709
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 709, 710
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।