किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं। मुनि मन मोह करइ छन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[सुग्रीवने कहा—] हे नाथ! विषयके समान और कोई मद नहीं है। यह मुनियोंके मनमें भी क्षणमात्रमें मोह उत्पन्न कर देता है [फिर मैं तो विषयी जीव ही ठहरा]। सुग्रीवके विनययुक्त वचन सुनकर लक्ष्मणजीने सुख पाया और उनको बहुत प्रकारसे समझाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 701 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं। मुनि मन मोह करइ छन माहीं।।
सुनत बिनीत बचन सुख पावा। लछिमन तेहि बहु बिधि समुझावा।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 701, 701
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं। मुनि मन मोह करइ छन माहीं।।
English explanation
My lord, no intoxication equals that of sensual pleasures; it deludes even sages’ minds in a moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| बिषय | इंद्रियों के भोग | sensual pleasures |
| सम | के समान | equal to |
| मद | नशा | intoxication |
| कछु | कोई | any |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन को | minds |
| मोह | मोहित | deluded |
| करइ | कर देता है | makes |
| छन | क्षण | a moment |
| माहीं | में | within |
2 सुनत बिनीत बचन सुख पावा। लछिमन तेहि बहु बिधि समुझावा।।
English explanation
Hearing these humble words, Lakshmana was pleased and counseled Sugriva in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| बचन | वचन | words |
| सुख | प्रसन्नता | pleasure |
| पावा | पाई | felt |
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| तेहि | उन्हें, सुग्रीव को | him, Sugriva |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | ways |
| समुझावा | समझाया | counseled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 701
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 701
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