किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि बिनती मंदिर लै आए। चरन पखारि पलँग बैठाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे विनती करके उन्हें महलमें ले आये तथा चरणोंको धोकर उन्हें पलँगपर बैठाया। तब वानरराज सुग्रीवने उनके चरणोंमें सिर नवाया और लक्ष्मणजीने हाथ पकड़कर उनको गलेसे लगा लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 701 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करि बिनती मंदिर लै आए। चरन पखारि पलँग बैठाए।।
तब कपीस चरनन्हि सिरु नावा। गहि भुज लछिमन कंठ लगावा।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 701, 701
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करि बिनती मंदिर लै आए। चरन पखारि पलँग बैठाए।।
English explanation
With a humble appeal, they brought Lakshmana into the palace, washed his feet, and seated him on a couch.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| बिनती | विनती | a humble appeal |
| मंदिर | राजभवन में | into the palace |
| लै | लेकर | bringing |
| आए | आए | came |
| चरन | चरण | feet |
| पखारि | धोकर | having washed |
| पलँग | पलंग पर | on a couch |
| बैठाए | बैठाया | seated him |
2 तब कपीस चरनन्हि सिरु नावा। गहि भुज लछिमन कंठ लगावा।।
English explanation
Then Sugriva bowed his head at Lakshmana’s feet; Lakshmana took him by the arm and embraced him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव ने | Sugriva, king of the monkeys |
| चरनन्हि | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| भुज | बाँह | arm |
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| कंठ | गले से | to his neck |
| लगावा | लगा लिया | drew him close |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 701
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 701
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