किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
मूल पाठ
नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
मय सुत मायावी तेहि नाऊँ। आवा सो प्रभु हमरें गाऊँ।।
स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सुग्रीवने कहा—] हे नाथ! बालि और मैं दो भाई हैं। हम दोनोंमें ऐसी प्रीति थी कि वर्णन नहीं की जा सकती। हे प्रभो! मय दानवका एक पुत्र था, उसका नाम मायावी था। एक बार वह हमारे गाँवमें आया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 686 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
English explanation
Lord, Bali and I are brothers. Such was our affection that it cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नात | हे नाथ | O Lord |
| बालि | बालि, सुग्रीव के भाई | Bali, Sugriva’s brother |
| अरु | और | and |
| मैं | मैं, सुग्रीव | I, Sugriva |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| प्रीति | परस्पर प्रेम | mutual affection |
| रही | था | existed |
| कछु | कुछ ऐसा | such |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
2 मय सुत मायावी तेहि नाऊँ। आवा सो प्रभु हमरें गाऊँ।।
English explanation
There was a son of Maya named Mayavi. Lord, he came to our town.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मय | मय दानव | Maya, the demon |
| सुत | पुत्र | son |
| मायावी | मायावी नामक दानव | the demon named Mayavi |
| तेहि | उसका | his |
| नाऊँ | नाम | name |
| आवा | आया | came |
| सो | वह | he |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| हमरें | हमारे | our |
| गाऊँ | नगर में | to the town |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 686
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।