किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अर्ध राति पुर द्वार पुकारा। बाली रिपु बल सहै न पारा।।
मूल पाठ
अर्ध राति पुर द्वार पुकारा। बाली रिपु बल सहै न पारा।।
धावा बालि देखि सो भागा। मैं पुनि गयउँ बंधु सँग लागा।।
स्रोत अभिलेख 4.6 · पुस्तक पृ. 686, 687
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने आधी रातको नगरके फाटकपर आकर पुकारा (ललकारा)। बालि शत्रुके बल (ललकार) को सह नहीं सका। वह दौड़ा, उसे देखकर मायावी भागा। मैं भी भाईके सङ्ग लगा चला गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 686 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अर्ध राति पुर द्वार पुकारा। बाली रिपु बल सहै न पारा।।
English explanation
At midnight he issued a challenge at the town gate. Bali could not tolerate this display of the enemy’s might.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अर्ध | आधी | half |
| राति | रात | night |
| पुर | नगर के | of the town |
| द्वार | द्वार पर | at the gate |
| पुकारा | ललकारा | called out a challenge |
| बाली | बालि | Bali |
| रिपु | शत्रु का | the enemy’s |
| बल | बल-प्रदर्शन | display of might |
| सहै | सहन कर | tolerate |
| न | नहीं | not |
| पारा | सके | could |
2 धावा बालि देखि सो भागा। मैं पुनि गयउँ बंधु सँग लागा।।
English explanation
Bali rushed out; seeing him, Mayavi fled. I too followed along with my brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धावा | दौड़े | rushed out |
| बालि | बालि | Bali |
| देखि | देखकर | seeing him |
| सो | वह मायावी | he, Mayavi |
| भागा | भागा | fled |
| मैं | मैं | I |
| पुनि | भी | also |
| गयउँ | गया | went |
| बंधु | भाई के | my brother |
| सँग | साथ | with |
| लागा | पीछे लगा हुआ | following along |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 686
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 686, 687
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।