किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि पवन सुत पति अनुकूला। हृदयँ हरष बीती सब सूला।।
मूल पाठ
देखि पवन सुत पति अनुकूला। हृदयँ हरष बीती सब सूला।।
नाथ सैल पर कपिपति रहई। सो सुग्रीव दास तव अहई।।
स्रोत अभिलेख 4.4 · पुस्तक पृ. 685, 685
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्वामीको अनुकूल (प्रसन्न) देखकर पवनकुमार हनुमान्जीके हृदयमें हर्ष छा गया और उनके सब दु:ख जाते रहे। [उन्होंने कहा—] हे नाथ! इस पर्वतपर वानरराज सुग्रीव रहता है, वह आपका दास है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 685 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि पवन सुत पति अनुकूला। हृदयँ हरष बीती सब सूला।।
English explanation
This is an AI-generated draft interpretation. Seeing his lord Rama favorably disposed, Hanuman, the wind-god’s son, rejoiced at heart, and all his distress passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| पवन | पवनदेव के | of the wind-god |
| सुत | पुत्र हनुमान | son, Hanuman |
| पति | स्वामी राम को | his lord Rama |
| अनुकूला | अनुकूल, कृपालु | favorably disposed, gracious |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| हरष | आनंद हुआ | joy arose |
| बीती | मिट गई | passed away |
| सब | सारी | all |
| सूला | पीड़ा | distress |
2 नाथ सैल पर कपिपति रहई। सो सुग्रीव दास तव अहई।।
English explanation
Lord, the king of the monkeys lives on the mountain; that Sugriva is your servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| सैल | पर्वत | mountain |
| पर | पर | on |
| कपिपति | वानरों के राजा | king of the monkeys |
| रहई | रहते हैं | lives |
| सो | वे | he |
| सुग्रीव | सुग्रीव, वानरराज | Sugriva, the monkey king |
| दास | सेवक | servant |
| तव | आपके | your |
| अहई | हैं | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 685
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 685
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।