किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि सन नाथ मयत्री कीजे। दीन जानि तेहि अभय करीजे।।
मूल पाठ
तेहि सन नाथ मयत्री कीजे। दीन जानि तेहि अभय करीजे।।
सो सीता कर खोज कराइहि। जहँ तहँ मरकट कोटि पठाइहि।।
स्रोत अभिलेख 4.4 · पुस्तक पृ. 685, 685
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! उससे मित्रता कीजिये और उसे दीन जानकर निर्भय कर दीजिये। वह सीताजीकी खोज करावेगा और जहाँ-तहाँ करोड़ों वानरोंको भेजेगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 685 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेहि सन नाथ मयत्री कीजे। दीन जानि तेहि अभय करीजे।।
English explanation
Lord, make friends with him; knowing him to be helpless, grant him freedom from fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उनके | him |
| सन | साथ | with |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| मयत्री | मित्रता | friendship |
| कीजे | कीजिए | please establish |
| दीन | असहाय, दुखी | helpless, distressed |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| तेहि | उन्हें | him |
| अभय | निर्भय | free from fear |
| करीजे | कर दीजिए | please make |
2 सो सीता कर खोज कराइहि। जहँ तहँ मरकट कोटि पठाइहि।।
English explanation
He will have Sita searched for and send millions of monkeys everywhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे सुग्रीव | he, Sugriva |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| कर | की | of; for |
| खोज | खोज | search |
| कराइहि | करवाएँगे | will have carried out |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| मरकट | वानर | monkeys |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions |
| पठाइहि | भेजेंगे | will send |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 685
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 685, 685
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।