किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि इंदु चकोर समुदाई। चितवतहिं जिमि हरिजन हरि पाई।।
मूल पाठ
देखि इंदु चकोर समुदाई। चितवतहिं जिमि हरिजन हरि पाई।।
मसक दंस बीते हिम त्रासा। जिमि द्विज द्रोह किएँ कुल नासा।।
स्रोत अभिलेख 4.17 · पुस्तक पृ. 698, 699
भावार्थ
मूल पाठ के बादचकोरोंके समुदाय चन्द्रमाको देखकर इस प्रकार टकटकी लगाये हैं जैसे भगवद्भक्त भगवान्को पाकर उनके [निॢनमेष नेत्रोंसे] दर्शन करते हैं। मच्छर और डाँस जाड़ेके डरसे इस प्रकार नष्ट हो गये जैसे ब्राह्मणके साथ वैर करनेसे कुलका नाश हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 699 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि इंदु चकोर समुदाई। चितवतहिं जिमि हरिजन हरि पाई।।
English explanation
Seeing the moon, flocks of chakoras gaze at it, just as Hari’s devotees gaze at him upon finding him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| इंदु | चंद्रमा को | the moon |
| चकोर | चकोर पक्षियों के | of chakora birds |
| समुदाई | समूह | flocks |
| चितवतहिं | निहारते हैं | gaze |
| जिमि | जैसे | just as |
| हरिजन | हरि के भक्त | Hari’s devotees |
| हरि | भगवान हरि को | Lord Hari |
| पाई | पाकर | upon finding |
2 मसक दंस बीते हिम त्रासा। जिमि द्विज द्रोह किएँ कुल नासा।।
English explanation
Mosquitoes and biting flies have disappeared from fear of the cold, just as a lineage is destroyed by hostility toward Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मसक | मच्छर | mosquitoes |
| दंस | डाँस, काटने वाली मक्खियाँ | biting flies |
| बीते | समाप्त हो गए | have disappeared |
| हिम | ठंड के | of the cold |
| त्रासा | भय से | from fear |
| जिमि | जैसे | just as |
| द्विज | ब्राह्मणों से | toward Brahmins |
| द्रोह | द्वेष, विरोध | hostility |
| किएँ | करने पर | upon committing |
| कुल | वंश का | of the lineage |
| नासा | नाश | destruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 699
- सहायक विषय
- शरद्-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 698, 699
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।