किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दूरि ते ताहि सबन्हि सिर नावा। पूछें निज बृत्तांत सुनावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददूरसे ही सबने उसे सिर नवाया और पूछनेपर अपना सब वृत्तान्त कह सुनाया। तब उसने कहा—जलपान करो और भाँति-भाँतिके रसीले सुन्दर फल खाओ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 705 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दूरि ते ताहि सबन्हि सिर नावा। पूछें निज बृत्तांत सुनावा।।
तेहिं तब कहा करहु जल पाना। खाहु सुरस सुंदर फल नाना।।
स्रोत अभिलेख 4.25 · पुस्तक पृ. 705, 706
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दूरि ते ताहि सबन्हि सिर नावा। पूछें निज बृत्तांत सुनावा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: All the monkeys bowed their heads to Svayamprabha from a distance and, when asked, related their own account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूरि | दूर | a distance |
| ते | से | from |
| ताहि | उनको, स्वयंप्रभा को | to her, Svayamprabha |
| सबन्हि | सबने | everyone |
| सिर | सिर | their heads |
| नावा | झुकाया | bowed |
| पूछें | पूछे जाने पर | when asked |
| निज | अपना | their own |
| बृत्तांत | वृत्तांत; अपनी स्थिति का विवरण | account of their circumstances |
| सुनावा | सुनाया | related |
2 तेहिं तब कहा करहु जल पाना। खाहु सुरस सुंदर फल नाना।।
English explanation
Then Svayamprabha said, “Drink water and eat the many kinds of delicious, lovely fruits.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उन्होंने, स्वयंप्रभा ने | she, Svayamprabha |
| तब | तब | then |
| कहा | कहा | said |
| करहु | करो | do |
| जल | जल | water |
| पाना | पान; पीना | drinking |
| खाहु | खाओ | eat |
| सुरस | स्वादिष्ट | delicious |
| सुंदर | सुंदर | lovely |
| फल | फल | fruits |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 705
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 705, 706
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।