किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेज न सहि सक सो फिरि आवा । मै अभिमानी रबि निअरावा ।।
मूल पाठ
तेज न सहि सक सो फिरि आवा । मै अभिमानी रबि निअरावा ।।
जरे पंख अति तेज अपारा । परेउँ भूमि करि घोर चिकारा ।।
स्रोत अभिलेख 4.28 · पुस्तक पृ. 708, 709
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह (जटायु) तेज नहीं सह सका, इससे लौट आया। (किन्तु) मैं अभिमानी था इसलिये सूर्यके पास चला गया। अत्यन्त अपार तेजसे मेरे पंख जल गये। मैं बड़े जोरसे चीख मारकर जमीनपर गिर पड़ा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 708 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेज न सहि सक सो फिरि आवा । मै अभिमानी रबि निअरावा ।।
English explanation
Jatayu could not endure the sun's heat and returned; I, in my pride, drew closer to the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेज | सूर्य का ताप | the sun's heat |
| न | नहीं | not |
| सहि | सहन कर | endure |
| सक | सका | could |
| सो | वह जटायु | he, Jatayu |
| फिरि | लौटकर | back |
| आवा | आया | came |
| मै | मैं, संपाति | I, Sampati |
| अभिमानी | अभिमान से भरा | filled with pride |
| रबि | सूर्य के | to the sun |
| निअरावा | निकट गया | drew nearer |
2 जरे पंख अति तेज अपारा । परेउँ भूमि करि घोर चिकारा ।।
English explanation
My wings burned in the sun's overwhelming heat, and I fell to the ground with a terrible cry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरे | जल गए | were burned |
| पंख | पंख | wings |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| तेज | ताप से | from the heat |
| अपारा | असीम, प्रचंड | boundless, overwhelming |
| परेउँ | मैं गिर पड़ा | I fell |
| भूमि | भूमि पर | to the ground |
| करि | करते हुए | uttering |
| घोर | भयानक | terrible |
| चिकारा | चीख | cry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 708
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 708, 709
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।