किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
मूल पाठ
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
सेवक सुत पति मातु भरोसें। रहइ असोच बनइ प्रभु पोसें।।
स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 684, 684
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसपर हे रघुवीर! मैं आपकी दुहाई (शपथ) करके कहता हूँ कि मैं भजन-साधन कुछ नहीं जानता। सेवक स्वामीके और पुत्र माताके भरोसे निश्चिन्त रहता है। प्रभुको सेवकका पालन-पोषण करते ही बनता है (करना ही पड़ता है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 684 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
English explanation
Moreover, O Rama, hero of Raghu's line, invoking you as my witness, I say that I know no means of devotional worship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उसके | that |
| पर | ऊपर; अतिरिक्त | on top of; moreover |
| मैं | मैं | I |
| रघुबीर | हे रघुवंश के वीर राम | O Rama, hero of Raghu's line |
| दोहाई | आपकी दुहाई; आपकी शपथ | invoking you as witness |
| जानउँ | जानता हूँ | know |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कोई भी | any |
| भजन | भक्ति-उपासना का | of devotional worship |
| उपाई | उपाय; साधन | means; method |
2 सेवक सुत पति मातु भरोसें। रहइ असोच बनइ प्रभु पोसें।।
English explanation
A servant rests carefree in the master's care, and a son in his mother's; it befits the master to provide for the dependent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक | a servant |
| सुत | पुत्र | a son |
| पति | स्वामी के | in the master's |
| मातु | माता के | in the mother's |
| भरोसें | भरोसे | care; trust |
| रहइ | रहता है | remains |
| असोच | निश्चिंत | free from worry |
| बनइ | उचित है; शोभा देता है | is fitting; befits |
| प्रभु | स्वामी को | the master |
| पोसें | पालन करने में | to nurture and provide |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 684
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 684, 684
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।