किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि परेउ चरन अकुलाई। निज तनु प्रगटि प्रीति उर छाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा कहकर हनुमान्जी अकुलाकर प्रभुके चरणोंपर गिर पड़े, उन्होंने अपना असली शरीर प्रकट कर दिया। उनके हृदयमें प्रेम छा गया। तब श्रीरघुनाथजीने उन्हें उठाकर हृदयसे लगा लिया और अपने नेत्रोंके जलसे सींचकर शीतल किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 684 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस कहि परेउ चरन अकुलाई। निज तनु प्रगटि प्रीति उर छाई।।
तब रघुपति उठाइ उर लावा। निज लोचन जल सींचि जुड़ावा।।
स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 684, 684
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस कहि परेउ चरन अकुलाई। निज तनु प्रगटि प्रीति उर छाई।।
English explanation
Saying this, Hanuman fell at Rama's feet in emotional agitation. He revealed his own form, and love filled his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| परेउ | गिर पड़े | fell down |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| अकुलाई | व्याकुल होकर | overcome with emotion |
| निज | अपना | his own |
| तनु | शरीर; वास्तविक रूप | body; true form |
| प्रगटि | प्रकट करके | having revealed |
| प्रीति | प्रेम | love |
| उर | हृदय में | in the heart |
| छाई | छा गया | filled; pervaded |
2 तब रघुपति उठाइ उर लावा। निज लोचन जल सींचि जुड़ावा।।
English explanation
Then Rama lifted Hanuman and embraced him, soothing him by bathing him with tears from his own eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu's line |
| उठाइ | उठाकर | having lifted him |
| उर | हृदय से; छाती से | to his heart; to his chest |
| लावा | लगा लिया | held close |
| निज | अपनी | his own |
| लोचन | आँखों के | of the eyes |
| जल | जल; आँसुओं से | water; with tears |
| सींचि | सींचकर | having bathed him |
| जुड़ावा | शीतल किया; शांत किया | cooled; soothed him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 684
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 684, 684
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।