किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह कें असि मति सहज न आई। ते सठ कत हठि करत मिताई।।
मूल पाठ
जिन्ह कें असि मति सहज न आई। ते सठ कत हठि करत मिताई।।
कुपथ निवारि सुपंथ चलावा। गुन प्रगटे अवगुनन्हि दुरावा।।
स्रोत अभिलेख 4.7 · पुस्तक पृ. 687, 690
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्हें स्वभावसे ही ऐसी बुद्धि प्राप्त नहीं है, वे मूर्ख हठ करके क्यों किसीसे मित्रता करते हैं? मित्रका धर्म है कि वह मित्रको बुरे मार्गसे रोककर अच्छे मार्गपर चलावे। उसके गुण प्रकट करे और अवगुणोंको छिपावे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 688 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिन्ह कें असि मति सहज न आई। ते सठ कत हठि करत मिताई।।
English explanation
Why do those fools insist on friendship when such understanding does not arise naturally in them?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन लोगों | those whom |
| कें | को | to |
| असि | ऐसी | such |
| मति | समझ | understanding |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| न | नहीं | not |
| आई | आई | arose |
| ते | वे | they |
| सठ | मूर्ख | fools |
| कत | क्यों | why |
| हठि | हठ करके | insistently |
| करत | करते हैं | make |
| मिताई | मित्रता | friendship |
2 कुपथ निवारि सुपंथ चलावा। गुन प्रगटे अवगुनन्हि दुरावा।।
English explanation
A friend turns one away from the wrong path and guides one along the right, reveals one's virtues, and conceals one's faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुपथ | बुरे मार्ग से | from the wrong path |
| निवारि | रोककर | turning away |
| सुपंथ | अच्छे मार्ग पर | on the right path |
| चलावा | चलाए | guides |
| गुन | गुण | virtues |
| प्रगटे | प्रकट करे | reveals |
| अवगुनन्हि | दोषों को | faults |
| दुरावा | छिपाए | conceals |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 688
- सहायक विषय
- सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन · सुग्रीवका वैराग्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 687, 690
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।