किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जमिहहिं पंख करसि जनि चिंता । तिन्हहि देखाइ देहेसु तैं सीता।।
मूल पाठ
जमिहहिं पंख करसि जनि चिंता । तिन्हहि देखाइ देहेसु तैं सीता।।
मुनि कइ गिरा सत्य भइ आजू । सुनि मम बचन करहु प्रभु काजू।।
स्रोत अभिलेख 4.28 · पुस्तक पृ. 708, 709
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर तेरे पंख उग आयेंगे; चिन्ता न कर। उन्हें तू सीताजीको दिखा देना। मुनिकी वह वाणी आज सत्य हुई। अब मेरे वचन सुनकर तुम प्रभुका कार्य करो॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 709 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जमिहहिं पंख करसि जनि चिंता । तिन्हहि देखाइ देहेसु तैं सीता।।
English explanation
Your wings will grow again; do not worry. Show those messengers where Sita is.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जमिहहिं | उग आएँगे | will grow again |
| पंख | पंख | wings |
| करसि | करना | do |
| जनि | मत | not |
| चिंता | चिंता | worry |
| तिन्हहि | उन दूतों को | to those messengers |
| देखाइ | स्थान दिखाकर | showing the location |
| देहेसु | दे देना | be sure to do so |
| तैं | तुम | you |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
2 मुनि कइ गिरा सत्य भइ आजू । सुनि मम बचन करहु प्रभु काजू।।
English explanation
The sage's words have come true today. Listen to my words and carry out Lord Rama's task.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | the sage |
| कइ | की | of |
| गिरा | वाणी | words |
| सत्य | सत्य | true |
| भइ | हो गई | became |
| आजू | आज | today |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मम | मेरे | my |
| बचन | वचन | words |
| करहु | करो | carry out |
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama's |
| काजू | कार्य | task |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 709
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 708, 709
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।