किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरि त्रिकूट ऊपर बस लंका । तहँ रह रावन सहज असंका ।।
मूल पाठ
गिरि त्रिकूट ऊपर बस लंका । तहँ रह रावन सहज असंका ।।
तहँ असोक उपबन जहँ रहई ।। सीता बैठि सोच रत अहई।।
स्रोत अभिलेख 4.28 · पुस्तक पृ. 708, 709
भावार्थ
मूल पाठ के बादत्रिकूट पर्वतपर लङ्का बसी हुई है। वहाँ स्वभावहीसे निडर रावण रहता है। वहाँ अशोक नामका उपवन (बगीचा) है, जहाँ सीताजी रहती हैं। [इस समय भी] वे सोचमें मग्र बैठी हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 709 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गिरि त्रिकूट ऊपर बस लंका । तहँ रह रावन सहज असंका ।।
English explanation
Lanka stands upon Mount Trikuta; Ravana lives there naturally free of fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरि | पर्वत | mountain |
| त्रिकूट | त्रिकूट नामक | named Trikuta |
| ऊपर | ऊपर | upon |
| बस | बसी है | is situated |
| लंका | लंका नगरी | the city of Lanka |
| तहँ | वहाँ | there |
| रह | रहता है | lives |
| रावन | राक्षसराज रावण | Ravana, king of demons |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| असंका | निःशंक, निर्भय | without apprehension or fear |
2 तहँ असोक उपबन जहँ रहई ।। सीता बैठि सोच रत अहई।।
English explanation
There is an ashoka grove there, where Sita sits immersed in sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| असोक | अशोक वृक्षों का | of ashoka trees |
| उपबन | उपवन | grove |
| जहँ | जहाँ | where |
| रहई | रहती हैं | resides |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| बैठि | बैठी हुई | seated |
| सोच | शोक में | in sorrow |
| रत | डूबी हुई | immersed |
| अहई | हैं | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 709
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 708, 709
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।