किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही। लछिमन अभय बाँह तेहि दीन्ही।।
मूल पाठ
चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही। लछिमन अभय बाँह तेहि दीन्ही।।
क्रोधवंत लछिमन सुनि काना। कह कपीस अति भयँ अकुलाना।।
स्रोत अभिलेख 4.2 · पुस्तक पृ. 701, 701
भावार्थ
मूल पाठ के बादअंगदने उनके चरणोंमें सिर नवाकर विनती की (क्षमायाचना की)। तब लक्ष्मणजीने उनको अभय बाँह दी (भुजा उठाकर कहा कि डरो मत)। सुग्रीवने अपने कानोंसे लक्ष्मणजीको क्रोधयुक्त सुनकर भयसे अत्यन्त व्याकुल होकर कहा—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 701 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही। लछिमन अभय बाँह तेहि दीन्ही।।
English explanation
He bowed his head at Lakshmana’s feet and made a plea; Lakshmana extended his arm to assure him of safety.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | चरणों में | at the feet |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिरु | सिर | head |
| बिनती | विनती | a plea |
| कीन्ही | की | made |
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| अभय | भय से मुक्ति का आश्वासन | assurance of safety |
| बाँह | बाँह | arm |
| तेहि | उन्हें | to him |
| दीन्ही | दी | gave |
2 क्रोधवंत लछिमन सुनि काना। कह कपीस अति भयँ अकुलाना।।
English explanation
Hearing that Lakshmana was angry, Sugriva, king of the monkeys, spoke in great fear and distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| क्रोधवंत | क्रोध से भरे | angry |
| लछिमन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| काना | कानों से | with his ears |
| कह | बोले | said |
| कपीस | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of the monkeys |
| अति | अत्यंत | greatly |
| भयँ | भय से | with fear |
| अकुलाना | व्याकुल होकर | becoming distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 701
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 701, 701
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