किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआकाशमें बादल घुमड़-घुमड़कर घोर गर्जना कर रहे हैं, प्रिया (सीताजी) के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजलीकी चमक बादलोंमें ठहरती नहीं, जैसे दुष्टकी प्रीति स्थिर नहीं रहती॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 695 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।
दामिनि दमक रह न घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 4.14 · पुस्तक पृ. 695, 696
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Clouds thunder fiercely and proudly in the sky; separated from my beloved, my heart is afraid.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घन | बादल | clouds |
| घमंड | गर्वभरे ढंग से | proudly |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| गरजत | गरज रहे हैं | are thundering |
| घोरा | भयंकर रूप से | fiercely |
| प्रिया | प्रिय पत्नी सीता | beloved wife Sita |
| हीन | से वियोग में | separated from |
| डरपत | डरता है | is afraid |
| मन | मन | heart |
| मोरा | मेरा | my |
2 दामिनि दमक रह न घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।
English explanation
Lightning's flash does not last within the clouds, just as a wicked person's affection is not steadfast.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दामिनि | बिजली | lightning |
| दमक | चमक | flash |
| रह | टिकती है | lasts |
| न | नहीं | not |
| घन | बादलों | clouds |
| माहीं | में | within |
| खल | दुष्ट व्यक्ति | a wicked person |
| कै | की | of |
| प्रीति | प्रीति | affection |
| जथा | जैसे | just as |
| थिर | स्थिर | steadfast |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 695
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 696
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।