किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि कथा कहहि बहु भाँती गिरि कंदराँ सुनी संपाती।।
मूल पाठ
एहि बिधि कथा कहहि बहु भाँती गिरि कंदराँ सुनी संपाती।।
बाहेर होइ देखि बहु कीसा। मोहि अहार दीन्ह जगदीसा।।
स्रोत अभिलेख 4.27 · पुस्तक पृ. 707, 708
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार जाम्बवान् बहुत प्रकारसे कथाएँ कह रहे हैं। इनकी बातें पर्वतकी कन्दरामें सम्पातीने सुनीं। बाहर निकलकर उसने बहुत-से वानर देखे। [तब वह बोला—] जगदीश्वरने मुझको घर बैठे बहुत-सा आहार भेज दिया!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 707 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि कथा कहहि बहु भाँती गिरि कंदराँ सुनी संपाती।।
English explanation
As the monkeys recounted their story in various ways, Sampati heard it in a mountain cave.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | in this manner |
| कथा | कथा; अपना वृत्तांत | story; their account |
| कहहि | कहते हैं | recount |
| बहु | अनेक | many |
| भाँती | तरह से | ways |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| कंदराँ | गुफा में | in a cave |
| सुनी | सुनी | heard |
| संपाती | संपाती, जटायु के भाई गिद्ध | Sampati, the vulture and Jatayu’s brother |
2 बाहेर होइ देखि बहु कीसा। मोहि अहार दीन्ह जगदीसा।।
English explanation
Coming outside, he saw many monkeys and said, ‘The Lord of the world has given me food.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाहेर | बाहर | outside |
| होइ | होकर; निकलकर | having come out |
| देखि | देखकर | seeing |
| बहु | बहुत-से | many |
| कीसा | वानर | monkeys |
| मोहि | मुझे | to me |
| अहार | भोजन | food |
| दीन्ह | दिया | has given |
| जगदीसा | जगत के स्वामी | the Lord of the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 707
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 707, 708
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