किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं। बीती अवधि काज कछु नाहीं।।
मूल पाठ
इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं। बीती अवधि काज कछु नाहीं।।
सब मिलि कहहिं परस्पर बाता। बिनु सुधि लएँ करब का भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 4.26 · पुस्तक पृ. 706, 707
भावार्थ
मूल पाठ के बादयहाँ वानरगण मनमें विचार कर रहे हैं कि अवधि तो बीत गयी; पर काम कुछ न हुआ। सब मिलकर आपसमें बात करने लगे कि हे भाई! अब तो सीताजीकी खबर लिये बिना लौटकर भी क्या करेंगे?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 706 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं। बीती अवधि काज कछु नाहीं।।
English explanation
AI draft: Here the monkeys reflect inwardly: the allotted time has passed, but nothing has been accomplished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ; इधर | here |
| बिचारहिं | विचार करते हैं | reflect |
| कपि | वानर | the monkeys |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| बीती | बीत गई | has elapsed |
| अवधि | निर्धारित समय | allotted time |
| काज | कार्य | task |
| कछु | कुछ भी | anything at all |
| नाहीं | नहीं हुआ | has not been done |
2 सब मिलि कहहिं परस्पर बाता। बिनु सुधि लएँ करब का भ्राता।।
English explanation
Gathering together, they say to one another: Brothers, what shall we do without obtaining news of Sita?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| मिलि | मिलकर | gathering together |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| परस्पर | एक-दूसरे से | to one another |
| बाता | बातें | words |
| बिनु | बिना | without |
| सुधि | सीता की खबर | news of Sita |
| लएँ | प्राप्त किए | obtaining |
| करब | हम करेंगे | shall we do |
| का | क्या | what |
| भ्राता | हे भाई | O brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 706
- सहायक विषय
- वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
- मुद्रित पृष्ठ
- 706, 707
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।