किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा। राम काजु सुग्रीवँ बिसारा।।
मूल पाठ
इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा। राम काजु सुग्रीवँ बिसारा।।
निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा। चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा।।
स्रोत अभिलेख 4.19 · पुस्तक पृ. 700, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादयहाँ (किष्किन्धानगरीमें) पवनकुमार श्रीहनुमान्जीने विचार किया कि सुग्रीवने श्रीरामजीके कार्यको भुला दिया। उन्होंने सुग्रीवके पास जाकर चरणोंमें सिर नवाया। [साम, दान, दण्ड, भेद] चारों प्रकारकी नीति कहकर उन्हें समझाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 700 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 इहाँ पवनसुत हृदयँ बिचारा। राम काजु सुग्रीवँ बिसारा।।
English explanation
Meanwhile, Hanuman, the wind god’s son, thought to himself that Sugriva had forgotten Rama’s task.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ; इधर | here; meanwhile |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| बिचारा | विचार किया | considered |
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| काजु | कार्य | task |
| सुग्रीवँ | सुग्रीव ने | Sugriva |
| बिसारा | भुला दिया | forgotten |
2 निकट जाइ चरनन्हि सिरु नावा। चारिहु बिधि तेहि कहि समुझावा।।
English explanation
Hanuman approached Sugriva, bowed his head at his feet, and counseled him using all four methods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निकट | पास | near |
| जाइ | जाकर | having gone |
| चरनन्हि | चरणों में | at his feet |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| चारिहु | चारों | all four |
| बिधि | उपाय | methods of counsel |
| तेहि | उसे, सुग्रीव को | him, Sugriva |
| कहि | कहकर | by explaining |
| समुझावा | समझाया | counseled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 700
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 700, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।