किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं।।
मूल पाठ
अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं।।
यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई। बिस्वरूप ब्यापक रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 4.22 · पुस्तक पृ. 702, 703
भावार्थ
मूल पाठ के बादसेनामें एक भी वानर ऐसा नहीं था जिससे श्रीरामजीने कुशल न पूछी हो। प्रभुके लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है; क्योंकि श्रीरघुनाथजी विश्वरूप तथा सर्वव्यापक हैं (सारे रूपों और सब स्थानोंमें हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 702 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं।।
English explanation
There was not a single monkey in the army whose well-being Rama did not ask about.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| कपि | वानर | monkey |
| एक | एक भी | even one |
| न | नहीं | not |
| सेना | सेना | the army |
| माहीं | में | in |
| राम | राम ने | Rama |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| जेहि | जिसकी | whose |
| पूछी | पूछी | asked about |
| नाहीं | नहीं | not |
2 यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई। बिस्वरूप ब्यापक रघुराई।।
English explanation
This is no extraordinary feat for the Lord; Rama, lord of Raghu’s line, has the universe as his form and is all-pervading.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| कछु | कोई विशेष बात | anything extraordinary |
| नहिं | नहीं | not |
| प्रभु | प्रभु | the Lord |
| कइ | की | of |
| अधिकाई | बड़ाई या महान सामर्थ्य का प्रदर्शन | display of greatness or power |
| बिस्वरूप | विश्व ही जिनका रूप है | whose form is the universe |
| ब्यापक | सर्वत्र व्याप्त | all-pervading |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 702
- सहायक विषय
- सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 702, 703
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।