बालकाण्ड · सोरठा 361 · सोरठा
सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु॥ ३६१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.361 · पुस्तक पृ. 340, 341
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
जो लोग सीता और रघुवीर राम के विवाह का वर्णन प्रेमपूर्वक गाते और सुनते हैं—
English explanation
Those who lovingly sing and hear the account of Sita and Rama’s wedding—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिय | सीता | Sita |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बिबाहु | विवाह का वर्णन | account of the wedding |
| जे | जो लोग | those who |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | with love |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
2तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु॥ ३६१॥
उनके लिए मंगल का धाम राम का यश सदा आनंद का स्रोत है।
English explanation
For them, Rama’s glory, the abode of auspiciousness, is an enduring source of joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कहुँ | के लिए | for |
| सदा | सदा | always |
| उछाहु | आनंद; उल्लास | joy; rejoicing |
| मंगलायतन | मंगल का धाम | abode of auspiciousness |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| जसु | यश | glory |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 361
- स्रोत अभिलेख
- 1.361
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द · श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 340, 341
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