अयोध्याकाण्ड · दोहा 1 · दोहा/सोरठा
सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबके हृदयमें ऐसी अभिलाषा है और सब महादेवजीको मनाकर (प्रार्थना करके) कहते हैं कि राजा अपने जीते-जी श्रीरामचन्द्रजीको युवराजपद दे दें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।
आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु।।1।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 344, 344
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।
English explanation
Such is the wish in everyone's heart; praying to propitiate Shiva, they say:
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| कें | के | of |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अभिलाषु | अभिलाषा | wish |
| अस | ऐसी | such |
| कहहिं | कहते हैं | they say |
| मनाइ | प्रार्थना करके प्रसन्न करते हुए | praying to propitiate |
| महेसु | महेश, शिव को | Shiva |
2 आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु।।1।।
English explanation
May the king confer the position of crown prince upon Rama while he himself is still alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आप | स्वयं | himself |
| अछत | जीवित रहते | while still alive |
| जुबराज | युवराज का | of crown prince |
| पद | पद | position |
| रामहि | राम को | to Rama |
| देउ | दें | may confer |
| नरेसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 1
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 344, 344
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।