अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।
मूल पाठ
मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।
राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 344, 344
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब माताएँ और सखी-सहेलियाँ अपनी मनोरथरूपी बेलको फली हुई देखकर आनन्दित हैं। श्रीरामचन्द्रजीके रूप, गुण, शील और स्वभावको देख-सुनकर राजा दशरथजी बहुत ही आनन्दित होते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।
English explanation
The mothers and all their companions rejoice to see the vine of their wishes bearing fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | आनंदित | delighted |
| मातु | माताएँ | the mothers |
| सब | सभी | all |
| सखीं | सखियाँ | female friends |
| सहेली | सहेलियाँ | companions |
| फलित | फल लगी हुई | bearing fruit |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| मनोरथ | मन की अभिलाषाओं की | of cherished wishes |
| बेली | बेल | vine |
2 राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
English explanation
Seeing and hearing of Rama's beauty, virtues, conduct, and disposition, King Dasharatha becomes deeply delighted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama's |
| रूपु | रूप-सौंदर्य | beauty |
| गुनसीलु | गुण और शील | virtues and good conduct |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| प्रमुदित | अत्यंत प्रसन्न | deeply delighted |
| होइ | होते हैं | becomes |
| देखि | देखकर | seeing |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| राऊ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 344, 344
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।