अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनगरका ऐश्वर्य कुछ कहा नहीं जाता। ऐसा जान पड़ता है, मानो ब्रह्माजीकी कारीगरी बस इतनी ही है। सब नगरनिवासी श्रीरामचन्द्रजीके मुखचन्द्रको देखकर सब प्रकारसे सुखी हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।
सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 344, 344
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।
English explanation
The city's splendor is beyond description, as though all Brahma's creative workmanship were concentrated here alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहा | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नगर | नगर की | of the city |
| बिभूती | वैभव | splendor |
| जनु | मानो | as though |
| एतनिअ | इतनी ही; यहीं तक | this alone; confined to here |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की | of Brahma, the creator |
| करतूती | सृजन-कला | creative workmanship |
2 सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी।।
English explanation
Gazing upon Ramachandra's moonlike face, all the city's people are happy in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| सब | सभी | all |
| पुर | नगर के | of the city |
| लोग | लोग | people |
| सुखारी | सुखी | happy |
| रामचंद | रामचंद्र का | of Rama |
| मुख | मुख | face |
| चंदु | चंद्रमा | moon |
| निहारी | निहारकर | gazing upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 344, 344
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।