अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऋद्धि-सिद्धि और सम्पत्तिरूपी सुहावनी नदियाँ उमड़-उमड़कर अयोध्यारूपी समुद्रमें आ मिलीं। नगरके स्त्री-पुरुष अच्छी जातिके मणियोंके समूह हैं, जो सब प्रकारसे पवित्र, अमूल्य और सुन्दर हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 344, 344
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
English explanation
The lovely rivers of prosperity, accomplishment, and wealth surged into the ocean that is Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिधि | समृद्धि | prosperity |
| सिधि | सिद्धि; सफल उपलब्धि | accomplishment; attainment |
| संपति | धन-संपदा | wealth |
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| उमगि | उमड़कर | surging |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| अंबुधि | समुद्र | ocean |
| कहुँ | की ओर; में | toward; into |
| आई | आ पहुँचीं | arrived |
2 मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।
English explanation
The city's men and women of noble families are like clusters of gems—pure, priceless, and beautiful in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनिगन | मणियों के समूह | clusters of gems |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सुजाती | उत्तम कुलों के | of noble families |
| सुचि | पवित्र | pure |
| अमोल | अमूल्य | priceless |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सब | सभी | every |
| भाँती | प्रकार से | way |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 344, 344
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।