अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।
मूल पाठ
जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।
भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 344, 344
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे श्रीरामचन्द्रजी विवाह करके घर आये, तबसे [अयोध्यामें] नित्य नये मङ्गल हो रहे हैं और आनन्दके बधावे बज रहे हैं। चौदहों लोकरूपी बड़े भारी पर्वतोंपर पुण्यरूपी मेघ सुखरूपी जल बरसा रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।
English explanation
AI-generated draft: Ever since Rama returned home after marrying, each day brought fresh auspicious celebrations, joy, and congratulations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तें | से | since |
| रामु | राम | Rama |
| ब्याहि | विवाह करके | having married |
| घर | घर | home |
| आए | लौट आए | returned |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नव | नए | new |
| मंगल | मंगल उत्सव | auspicious celebrations |
| मोद | आनंद | joy |
| बधाए | बधाइयाँ | congratulations |
2 भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।
English explanation
The fourteen worlds are like mighty mountains, where clouds of merit rain down the water of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुवन | लोक | worlds |
| चारिदस | चौदह | fourteen |
| भूधर | पर्वत | mountains |
| भारी | विशाल | mighty |
| सुकृत | पुण्य | merit from good deeds |
| मेघ | बादल | clouds |
| बरषहि | बरसाते हैं | rain down |
| सुख | सुख | happiness |
| बारी | जल | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 344, 344
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।