अयोध्याकाण्ड · दोहा · दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
मूल पाठ
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 343, 343
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीगुरुजीके चरणकमलोंकी रजसे अपने मनरूपी दर्पणको साफ करके मैं श्रीरघुनाथजीके उस निर्मल यशका वर्णन करता हूँ, जो चारों फलोंको (धर्म, अर्थ, काम, मोक्षको) देनेवाला है।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 344 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
English explanation
AI-draft meaning: Having cleansed the mirror of my mind with the dust of my revered guru’s lotus-like feet—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीगुरु | पूज्य गुरु के | of the revered spiritual teacher |
| चरन | चरण | feet |
| सरोज | कमल; यहाँ चरणों की उपमा | lotus; here describing the feet as lotus-like |
| रज | धूल से | with the dust |
| निज | अपने | my own |
| मनु | मन | mind |
| मुकुरु | दर्पण; यहाँ मनरूपी दर्पण | mirror; here the mind as a mirror |
| सुधारि | स्वच्छ करके | having cleansed |
2बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
English explanation
AI-draft meaning: I recount the pure glory of Rama, foremost of Raghu’s lineage, which bestows the four fruits of life: righteousness, prosperity, fulfillment of desire, and liberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनउँ | मैं वर्णन करता हूँ | I recount |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ श्रीराम का | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बिमल | निर्मल | pure |
| जसु | यश | glory |
| जो | जो; उस यश के लिए | which; referring to that glory |
| दायकु | देने वाला | bestowing |
| फल | फल; जीवन के पुरुषार्थ | fruits; the aims of human life |
| चारि | चार—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष | four—righteousness, prosperity, fulfillment of desire, and liberation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 344
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 343, 343
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।